उपन्यास जगत की महान हस्ती और अपराध और दंड जैसी सार्वकालिक कृति के सर्जक दास्वोएवस्की के जीवन को हम देखें तो वह भी अपराध और दंड के जटिल संजाल में गुत्थम-गुत्था दिखेगा। रूप सिंह चंदेल की पुस्तक दास्तोएवस्की के प्रेम को पढते हुए यह साफ हो जाता है कि जीवनानुभव की जमीन पर ही महान रचनाओं का सृजन होता है। कि दास्तोएवस्की की मनोवैज्ञानिक अंतर्दृष्टि और दार्शनिक गहनता के श्रोत उनकी जीवन सलिला में ही हैं। पुस्तक के प्राक्कथन में ही रूपसिंह कहते हैं - ... उनका कोई भी कार्य शायद ही इतना चौंकानेवाला हो,जितना उनका स्वयं की जीवन... विशेष रूप से वेश्याओं,आदर्शवादी विवाहिता महिलाओं,आकर्षक और स्वतंत्र उन्मुक्त औरतों और कामुक युवतियों के साथ बिताया गया उनका जीवन था, यही नहीं जुआ उनकी विशेष कमजोरी थी।
पुस्तक में रूपसिंह ने उन परिस्थितियों को विश्लेषित करने का प्रयास किया है जिसकी उपज थे दास्तोएवस्की। उनकी तीन प्रेमकथाओं की चर्चा रही है, अपने प्रेम में वे बहुत क्रूर हो जाते थे,पाशविकता की हद तक। एक तरह का सनकीपन हमेशा उनके साथ रहा। और क्यों ना हो किशोर वय में वे अपने अपने भाई के साथ पागल हो जाने की योजना पर विचार करते थे।
उनके जीवन में जो अस्तव्यस्तता रही उसकी जड़ें उनके पालन पोषण के तरीकों से जुड़ी दिखती हैं। दास्तोएवस्की कभी भी अपने पिता के बारे में बातें करना पसंद नहीं करते थे। उनके चिकित्सक पिता कठोर अनुशासन पसंद और शंकालु स्वभाव के थे और अपनी पत्नी को बराबर प्रताडि़त किया करते थे। पत्नी की मृत्यु के बाद उनके पिता ने नौकरी छोड़ दी और नौकरानी के साथ गांव जाकर रहने लगे,जहां ग्रामीणों व रिश्तेदारों ने उनकी हत्या कर दी।
प्रेम व्यवहार में पाशविकता की जड़ें हम उपरोक्त घटनाओं में तलाश सकते हैं। उनकी तीसरी पत्नी, जो उनके यहां टंकन के कार्य के लिए आई थीं और जिनके सामने उन्होंने प्रेम निवेदन किया तो वह भौंचक रह गयी थी पर आगे जिसे दास्तोएवस्की से प्रेम हो गया था, ने उन्हें संभाला। उनका नाम अन्ना था। दास्तोएवस्की ने जुआ में उसकी भी सारी चीजें गंवा दी थीं पर अन्न ने हिम्मत नहीं हारी। वह शायद भविष्य के इस लेखक को पहचान चुकी थीं और उसने जीवन भर और उसके बाद भी उनके मान-सम्मान की रक्षा में खुद को झोंक दिया। दास्तोएवस्की को उनकी लंपटता से मुक्त करने का श्रेय अन्ना को ही जाता है।
अन्ना जब दास्तोएवस्की के प्रेम में पड़ीं तो वे उसके पिता से भी ज्यादा उम्र के थे, पर अन्न का कहना था - लेकिन वे जवान थे,वह मेरे समय के युवकों से अधिक दिलचस्प और जीवंत थे ...। शादी के वक्त अन्न बीस की और दास्वोएवस्की पैंतालीस साल के थे। और मिरगी के वे पुराने मरीज थे। पर शायद अन्ना की पहचान सही थी, जिसने विश्व के इस महान रचनाकार को अपने स्नेह से संवारा। वह मानती थी कि - प्रेम करने में रूप-रंग,स्वास्थ्य और गरीबी बाधक नहीं होते।
दास्तोएवस्की की पहली पत्नी मारिया को उनसे प्रेम था या नहीं इस पर भी कई लोग शंका करते हैं, उनका मानना है कि वह उनपर दया करती थी व सहानुभूति दिखाती थी पर दास्तोएवस्की उसके दीवाने थे।
पहले परिचय में उनतीस वर्षीय मारिया इसाएव की पत्नी थी। इसाएव बीमार और शराबी था। दास्तोएवस्की उसके घर बराबर जाते थे। इसाएव उन्हें सम्मान से देखता था और दास्तोएवस्की उसके बेटे को पढाते थे। इसी दौरान उनकी मारिया से घंटों बातें होती थीं। आगे बीमारी और शराब की आदतों से इसाएव का असामयिक निधन हो गया। तब मारिया को पाने की व्याकुलता दास्तोएवस्की में चरम पर थी। पर मारिया उस समय एक अन्य स्वस्थ ग्रामीण युवक को चाहती थी। जिससे उसे एक पुत्र भी हुआ। बाद में दास्तोएवस्की की आर्थिक स्थिति सुधरी तो मारिया ने उनसे विवाह कर लिया। आगे मारिया भी बीमार रहने लगी और मर गयी।
मारिया के रहते ही दास्तोएवस्की को अपोलिनेरिया से प्रेम हो गया थ। पर यह भी असफल रहा। इसका श्रेय दास्तोएवस्की की यौन कुंठा को ही जाता है। प्रेम संबंधेां में वे यौन उन्मादी व परपीड़क सा व्यवहार करते थे व अपोलिनेरिया की अपनी महत्वाकांक्षाएं थीं।
पुस्तक को पढकर दास्तोएवस्की के जीवन के कई सकारात्मक पहलू भी समने आते हैं, जैसे कि वह रूस के पहले ऐसे लेखक थे जिन्होंने लेखन को जीवन का आधार बनाया था। वे लेखक के रूप में एक मजदूर की तरह निरंतर श्रम करते थे। यही कारण था कि उन्हें तुर्गनेव व तोस्तोय जैसे अभिजात वर्ग के लेखकों और नौकरशाह लेखकों से ईर्ष्या थी। तो अगर जुआ में धन उडाने की बीमारी उनमें थी तो लेखक के रूप में जी तोड़ मिहनत की सामर्थ्य भी।
यह आश्चर्यजनका था कि युवावस्था में क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण सश्रम कारावास भुगतने वाले दास्तोएवस्की की झुकाव धीरे-धीरे वामपंथ से दक्षिणपंथ की ओर होने लगा था और अंत में वे दक्षिणपंथी रह गए थे। जब रूस के राज्यतंत्रवादी लोग उग्र सुधारवादी व निरिश्वरवादी हो रहे थे दास्तोएवस्की राज्यतंत्रवादी व ईश्वर में आस्था रखने वाले होते जा रहे थे।
यह पुस्तक दास्तोएवस्की के जीवन को एक फिल्म की पटकथा की तरह सामने रख पाती है यह इसकी खूबी है।
Thursday, November 6, 2008
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